मंद मग्न दृढनिश्चयी क्लांत, चढ़ रहा क्षितिज रवि रश्मिकांत।
अविरल अनथक निष्काम कर्मठ, सम्पूर्ण जीवन पूर्ण अर्पण॥
प्रखर प्रबल प्रबुद्ध प्रकाश, उषा संध्या अनवरत प्रयास।
सुख शांतिदायक दिप्तिपुन्ज, अक्षय उर्जा संचरण॥
सत्य साधक शुध्ह चिन्तक, रक्षक संरक्षक मार्गदर्शक।
परहित समर्पित सदैव तत्पर, हे ! सूर्य रूप जनक प्रणाम॥
स्थितप्रज्ञ स्थिरचित्त, चेतन निरंतर निश्चिन्त शांत।
शांत शुद्ध पवित्र सात्विक, सत्य समर्पित आचरण॥
कृष्ण शुक्ल समभाव से, अकर्ता कर्म शुद्ध चित्रण।
आश्रय आनंद स्नेह सहस सकल सरस स्त्रवन॥
व्योम मंडित तामस खंडन, नक्षत्र नय नभपति विशाल।
रजनी प्रहार पथ प्रदर्शक, हे ! चन्द्र रूप पिता प्रणाम॥
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