हे नव परिवर्तक ! हे
नवोन्मेष ! हे क्रांतिदूत !
त्याग क्रियाहीन
अलक्षित जीवन
भ्रमित विश्व , भ्रमित प्रदर्शक
इन बिखरे पदचिन्हों
में तू
नवपदचिह्न बनाता चल |
हे तरुण ! हे
युगपुरुष ! हे महाप्राण !
जाग जाग रे जाग ! ओ
भारत के भव्य भाल |
हे भरत पुत्र ! हे
राष्ट्रपुरुष ! तू जाग !
नव्संकल्प संधारण कर
मातृभूमि का बनकर बल
. . . नवपदचिह्न बनाता चल |
हे अजेय ! हे
दृढप्रतिज्ञ ! हे पथप्रदर्शक !
पलट देख इतिहास
स्वयं का
पदचिन्हों पे चल कर
भी
तू महान बना है कभी ?
नई राह चुन, नव उर्जा ले |
नवमंवंतर गढता चल .
. . नवपदचिह्न बनाता चल |
हे पार्थसारथी ! हे
राघव ! हे विवेकानंद !
तू जाग
हे युवा ! हे तरुण !
अपनी शक्ति पहचान
साथ ले तू बान्धवो
को,
कर विजय प्रयाण
संगठित हो , संगठित कर
कदम से कदम मिलाता
चल . . . नवपदचिह्न बनाता चल |
हे शोर्यरूप ! हे दिग्विजयी
!
हे सेन्य रूप ! राष्ट्र
महान !
उठ जाग ! भर हुंकार
!
राष्ट्र ध्वज का
गौरव बन
कर्तव्यबोध का जगा
भाव |
स्वर्णिम इतिहास
बनाता चल . . . नवपदचिह्न बनाता चल |
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