Friday, August 30, 2013

युगान्तर



हे नव परिवर्तक ! हे नवोन्मेष ! हे  क्रांतिदूत !
त्याग क्रियाहीन अलक्षित जीवन
भ्रमित विश्व , भ्रमित प्रदर्शक
इन बिखरे पदचिन्हों में तू
नवपदचिह्न बनाता चल |

हे तरुण ! हे युगपुरुष ! हे  महाप्राण !
जाग जाग रे जाग ! ओ भारत के भव्य भाल |
हे भरत पुत्र ! हे राष्ट्रपुरुष ! तू जाग !
नव्संकल्प संधारण कर
मातृभूमि का बनकर बल . . . नवपदचिह्न बनाता चल |

हे अजेय ! हे दृढप्रतिज्ञ ! हे पथप्रदर्शक !
पलट देख इतिहास स्वयं का
पदचिन्हों पे चल कर भी
तू महान बना है कभी ?
नई राह चुन, नव उर्जा ले |
नवमंवंतर गढता चल . . . नवपदचिह्न बनाता चल |

हे पार्थसारथी ! हे राघव ! हे विवेकानंद !
तू जाग
हे युवा ! हे तरुण !
अपनी शक्ति पहचान
साथ ले तू बान्धवो को,
कर विजय प्रयाण
संगठित हो , संगठित कर
कदम से कदम मिलाता चल . . . नवपदचिह्न बनाता चल |

हे शोर्यरूप ! हे दिग्विजयी !
हे सेन्य रूप ! राष्ट्र महान !
उठ जाग ! भर हुंकार !
राष्ट्र ध्वज का गौरव बन
कर्तव्यबोध का जगा भाव |

स्वर्णिम इतिहास बनाता चल . . . नवपदचिह्न बनाता चल |


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